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Monday, January 22, 2018

बसंत की एक शाम

आज अंतर्मन में द्वन्द युद्ध चल रहा है! सवालों और चिंताओं की जैसे लड़ी लग गयी हो! कहीं एक शायरी सुनी थी कभी की ना शब्-ए-रोज़ अच्छा है ना हाल अच्छा है, किसी ने कहा था ये साल अच्छा है! आज वही शायरी फिर फिर कानों में गूँज रही है! सुबह से सैकड़ों SMS आ चुके हैं बसंत पंचमी की बधाई के, मगर किसी ने पूछना जरुरी नहीं समझा की मेरा हाल क्या है! एक कश्मकश में जूझ रहा हूँ मैं आज! कल रात कुछ भयानक सपनों ने डरा कर जगा दिया था मुझे! फिर सारी रात सो ही कहाँ पाया मैं! सोचा तुमसे बात करुँ फिर लगा की तुम सुकून की नींद सोये होंगे, जगाना ठीक नहीं होगा! आखिर मेरी ख़ुशी तुम्हारे सुकून पर ही तो टिकी हुई है! आज ऑफिस में बॉस से भी कुछ अनबन हो गयी, बात इतनी बढ़ गयी की बॉस ने मुझे रिजाइन देने को कह दिया! अचानक ये सुन कर टूट सा गया था मैं! हताश सा अपनी कुर्सी पर बैठे हुए अपने इस ऑफिस को दिए पिछले दो सालों के रोज के आठ घंटे याद कर रहा था! कहीं डूबा हुआ सा था मैं अपने इस बवंडर में कि अचानक फ़ोन के vibration ने मेरे अतीत के आईने को तोड़ते हुए मुझे झंझोर दिया! देखा तो तुम्हारा मैसेज था, तुम नाराज़ थी मुझसे, तुमसे नाराज़गी जाहिर की थी अपनी! हो भी क्यों ना, मैं वक़्त ही कहाँ दे पा रहा था तुम्हें! खुद में उलझा हुआ था मैं! मैंने तुम्हे फ़ोन लगाया और अपने अट्टहासों के पीछे अपने ऑफिस की बात को छुपा लिया! मैं परेशां इसलिए नहीं था की जॉब जा रही है, मैं परेशां इसलिए था की जिम्मेदारियों की बेल मुझपे एक अरसे से लिपटी हुयी हैं! मैंने तुम्हे बहुत मानना चाहा, तुम टालते रहे! जब फ़ोन रखा तो मेरे चेहरे पे एक चमक थी की मैंने तुम्हारी आवाज़ सुनी! मगर वक़्त इतनी जल्दी करवट लेगा ये कहाँ मालूम था मुझे! कुछ ही पलों में मुझे तुम्हारा एक और SMS मिला।
Tum bht ache insan ho ..BHT BHT BHT ache ....bht helping bhi ho or caring bhi. .isme koi doubt nhi h..bt mjhe nhi lgta ki tum mjhe khush rkh paoge, shyd nhi bn payegi yr hmari... shyd mjhme bht expectations Hain or tum nhi KR paoge yr meri expectations Puri...

मैं सर से पैर तक काँप गया था, मैंने कभी ऐसे उम्मीद नहीं की थी! तुम तो मेरा मनोबल थी ना! चंद रोज़ मैं तुम्हे वक़्त ना दे सका तो तुमने मेरे होने पर और मेरी मुहब्बत पर शक कर लिया! मेरे दोस्त मुझे तेरे नाम से चिढ़ाते हैं, तेरी कसमें दे कर हर काम करवा लेते हैं! उन्हें मना नहीं कर पता हूँ मैं कभी क्यूंकि मेरी बेल तो तुमसे लिपटी है ना!
तुमने मेरे हौसले पस्त कर दिए थे आज! मेरी भावनाओं को आज पहली बार ठेस पहुंची थी!  अमलताश के फूल देखे हैं तुमने कभी? जबसे भगवन कृष्ण का श्राप मिला है, तब से हमेशा अपनी डाली से बहुत दूर गिरे हुए मिलते हैं! आज मैंने उन फूलों में खुद को और उस डाली में तुमको देखा! जैसे तुमने मुझे खुद से बहुत दूर फेंक दिया हो! यहाँ कोई कृष्ण का श्राप नहीं था, यहाँ वक़्त का तकाज़ा था! यहाँ भावनाओं के भंवर थे जिनमें तुमने मुझे डूबा दिया था!
एक अर्से से इन आँखों ने आंसू नहीं पिये थे! आज वो अर्सा ख़तम हो गया! जी चाह रहा था की टूट कर रोया जाये आज, मगर ऑफिस के माहौल ने इजाजत ना दी! अपनी बाइक की चाभी पकड़ी और निकल गया बहार ऑफिस से! आज मुझे ट्रैफिक में फसने या किसी दुर्घटना का डर नहीं था! आज गाड़ियों के हॉर्न से ज्यादा तेज़ मेरे दिल की धड़कने थी!
तुम तो अक्सर कहा करती थी की तुम सिर्फ मेरी हो, तो मेरी तकलीफ क्यों नहीं महसूस करी तुमने? क्यों नहीं पूछा की मेरा हाल कैसा है? प्यार तो त्याग का नाम है, तुमने ये शर्तें क्यों रख दी?
मैंने तुम्हे कुछ नहीं कहा और शायद कहने को कुछ बचा भी नहीं था! पिछले १० सालों से तुम साथ हो तो क्यों आज तुमने ये फैसला कर लिया की मैं तुम्हारी उम्मीदों और सपनों को पूरा नहीं कर सकता? क्या इतना ही जाना तुमने मुझे? मेरी काबिलियत पर यकीन नहीं था क्या तुम्हें? याद करो ना, क्या मैंने कभी कोई शर्त रखी है प्यार में?
मुझे अब भी याद है जब तुमने कहा था की मैं तुम्हें जैसे भी रखूँ  तुम  किसी भी हाल में खुश रहोगे, तो क्यों तुम ये दूरी बर्दाश्त नहीं कर पायी? कल ही तो मैंने तुमसे फ़ोन पर बात की थी, मिलने का वक़्त नहीं हो पाया मुझे तो मैं क्या करुँ?
मुहब्बत मजाक है क्या? शब्दों में बयान करूँगा तब ही समझोगे क्या? मुहब्बत तो महसूस की जाती है, किसी के होने भर के अहसास से सुकून मिल जाता है! मैं चाँद रोज़ ना मिल पाया तो तुमने ये कदम उठा लिया, तब क्यों नहीं सोचा जब यहां से सैकड़ो मील दूर जॉब की तलाश में चली गयी थी तुम? तब क्यों नहीं सोचा तुमने मेरे बारे में की मैं अकेले कैसा रहूँगा?
घर पर वो इंतज़ार कर रही थी मेरा जिसे मैं सुबह छोड़ आया था अकेला! उसने चेहरा पढ़ कर ही मुझसे गले से लगा लिया! आज फिर से पुरानी यादें ताज़ा करेंगे हम दोनों, बाहों में बाहें डाले सुनेंगे एक दुसरे को! तुम्हारे बाद एक यही तो है जो सुनती है मुझे इत्मीनान से! ये कुछ पूछती नहीं है, बस महसूस कर लेती है मेरी उदासी! मेरी तन्हाई हमसफ़र ही हो गयी है मेरी! सुनो, मैं तुम्हारी शिकायत नहीं करूँगा इससे! बहला दूंगा इसे अपनी जॉब की बातों से! तुम बेफिक्र रहो, अगर बताया भी तो ये किसी को बताएगी नहीं। ये घर से बाहर अक्सर नहीं जाती है! मुझे इस पर उतना ही भरोसा है जितना तुम पर!
मुझे अपनी जॉब जाने की इतनी तकलीफ नहीं हुई जितना तुम्हारा ये SMS पढ़ कर!
मैं अपनी सफाई में कुछ नहीं कहूंगा! शायद तुम्हारा निर्णय सही भी है! मैं नहीं कहूंगा की हाँ मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा मगर इतना जरूर कहूंगा की मुझे मुहब्बत सिर्फ तुम्हीं से है! सिर्फ तुम्ही से! साथ में एक प्रार्थना है तुमसे की please अब ये बोल कर वापस मत आना की मजाक कर रहे थे!
शायद यही है मेरी ज़िन्दगी का बसंत!